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क़ुरआन पर अनुचित आक्षेप
وَإِذَا قَرَأْتَ الْقُرْآنَ جَعَلْنَا بَيْنَكَ وَبَيْنَ الَّذِينَ لَا يُؤْمِنُونَ بِالْآخِرَةِ حِجَابًا مَّسْتُورًا
क़ुरआन पर अनुचित आक्षेप
क़ुरआन पर अनुचित आक्षेपः यह पुस्तक उन आक्षेपों पर आधारित है जिन्हें कुछ हिन्दू संस्थाओं और लोगों की ओर से क़ुरआन की कुछ आयतों के बारे में उन्हें उनकी पृष्टिभूमि और संदर्भ से अलग करके और उनका मनमाना अनुवाद और व्याख्या करके बड़े पैमाने पर फैलाया जाता है। ये आक्षेप क़ुरआन मजीद की उन आयतों के बारे में हैं जिनका संबंध विशेषकर जिहाद,
नसीम ग़ाज़ी

क़ुरआन पर अनुचित आक्षेप

क़ुरआन पर अनुचित आक्षेपः यह पुस्तक उन आक्षेपों पर आधारित है जिन्हें कुछ हिन्दू संस्थाओं और लोगों की ओर से क़ुरआन की कुछ आयतों के बारे में उन्हें उनकी पृष्टिभूमि और संदर्भ से अलग करके और उनका मनमाना अनुवाद और व्याख्या करके बड़े पैमाने पर फैलाया जाता है। ये आक्षेप क़ुरआन मजीद की उन आयतों के बारे में हैं जिनका संबंध विशेषकर जिहाद,

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نسال الله العظيم رب العرش العظيم ان يرزقنا ومن عمل في هذا العمل ومن ساعد في نشره الدرجات العلى من الفردوس الأعلى من الجنة من غير حساب ولاسابق عذاب.هذا العمل خالصا لوجه الله تعالى. نسال الله العظيم ان يتقبله منا وممن عمل فيه ومن نشره بالقبول الحسن